फिल्म भ्राता जुड़वाँ गिरी (ममूटी) और गोवरी (नादिया मोइदु) की कहानी कहती है, जिन्होंने अपने माता-पिता को जीवन की शुरुआत में एक दुर्घटना में खो दिया था। वे एक अनाथालय, अविभाज्य में एक साथ बड़े हुए। जब वे अमीर हो गए, तो उन्होंने अपने माता-पिता की यादों में पुडुचेरी में एक दुर्घटना बचाव इकाई स्थापित की। उन्होंने बचाव अभियान चलाने के लिए पर्वतारोहण भी सीखा है। उनकी टीम में समीर (साएजू कुरुप), सुशीलेन (अनूप चंद्रन), बिजुकुट्टन, और लॉरेंस (सूरज वेनजरामुडु) नामक एम्बुलेंस-चेज़िंग वकील के लिए कुछ भी अच्छा नहीं है। गिरि और गौरी बिल्कुल अविभाज्य हैं, और इसी कारण अविवाहित भी रहे हैं। एक दिन वे एक दुर्घटना से सायरा बानो (तासपे पन्नू) नाम की लड़की को बचाते हैं, लेकिन तब सायरा की पहचान एक रहस्य बन जाती है। सायरा काफी समय तक एक पुरदाह के पीछे रहती है, और उसके आस-पास के पुरुष उसके चेहरे पर एक नज़र डालने के लिए आते हैं, जो फिल्म का हास्य तत्व बनाता है। गिरि को पता चलता है कि सायरा की दुर्घटना को गौरी के मंगेतर मिशाल (सुरेश) ने गढ़ा था। उनके खुशहाल जीवन के आसपास की हर चीज उस बिंदु से अचानक बदलाव लेती है।